माँ कालरात्रि की पूजा विधि: कैसे करें सही विधि से उपासना और प्राप्त करें वरदान | Maa Kalratri: kee pooja vidhi: kaise karen sahee vidhi se upaasana aur praapt karen varadaan
माँ कालरात्रि की पूजा विधि: कैसे करें सही विधि से उपासना और प्राप्त करें वरदान ?
नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व होता है। माँ कालरात्रि अपने भक्तों के सभी संकटों का नाश करती हैं और उन्हें भयमुक्त जीवन का आशीर्वाद देती हैं। यदि सही विधि से माँ की उपासना की जाए, तो साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं माँ कालरात्रि की पूजा विधि और विशेष उपाय।
माँ कालरात्रि की पूजा विधि
स्नान और शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की शुद्धि: पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें।
प्रतिमा या चित्र स्थापना: माँ कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
सजावट: पूजा स्थल को लाल पुष्पों और दीपों से सजाएं।
पूजन विधि
घी का दीपक प्रज्वलित करें।
माँ को लाल वस्त्र अर्पित करें।
गुड़हल के फूल, रोली, अक्षत, चंदन और अगरबत्ती चढ़ाएं।
माँ को मिष्ठान, पंचमेवा और पाँच प्रकार के फल अर्पित करें।
विशेष भोग: माँ को गुड़ और शहद से बने पकवानों का भोग लगाएं।
मंत्र जाप: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
कथा पाठ: दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
आरती: माँ कालरात्रि की आरती गाएं और परिवार सहित जयकारे लगाएं।
माँ कालरात्रि को प्रसन्न करने के उपाय
- गुड़, गुड़ की खीर या गुड़ से बनी चीज का भोग लगाएं।
- माँ को लाल वस्त्र और लाल पुष्प अर्पित करें।
- लाल चंदन की माला से माँ के मंत्रों का जाप करें।
- सच्चे मन से माँ की कथा सुनें और भक्तिभाव से आराधना करें।
माँ कालरात्रि की कृपा से प्राप्त होने वाले वरदान
- सभी प्रकार के भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा।
- शत्रुओं पर विजय और जीवन में सफलता।
- आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग।
- रोग, दुर्घटना और अकाल मृत्यु से सुरक्षा।
यदि नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की सच्चे मन से पूजा की जाए, तो भक्त के जीवन में हर प्रकार के कष्ट और विघ्न दूर हो जाते हैं। माँ की कृपा से आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है
टिप्पणियाँ