माँ कालरात्रि कौन हैं जानें इनके भयावह रूप और अलौकिक शक्तियाँ | Maa Kalratri kaun hain jaanen inake bhayaavah roop aur alaukik shaktiyaan
माँ कालरात्रि कौन हैं जानें इनके भयावह रूप और अलौकिक शक्तियाँ
माँ कालरात्रि, नवदुर्गा के सातवें स्वरूप के रूप में पूजनीय हैं। इन्हें अत्यंत क्रोधी और शक्तिशाली देवी माना जाता है, जो जब-जब धरती पर पाप और अन्याय बढ़ता है, तब दुष्टों का संहार करने के लिए अवतरित होती हैं। माँ कालरात्रि को अंधकार की देवी भी कहा जाता है, लेकिन उनका भयंकर स्वरूप केवल असुरों, दानवों और पापियों के लिए है, जबकि भक्तों को वे शुभ फल प्रदान करती हैं।
माँ कालरात्रि का स्वरूप
माँ कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयानक और दिव्य है। वे काले रंग की हैं, उनके बिखरे हुए बाल और उग्र तेजस्वी रूप उन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाता है। उनके तीन नेत्र हैं, जो ब्रह्मांडीय शक्ति से चमकते हैं और उनकी दृष्टि से ही बुराइयाँ समाप्त हो जाती हैं। माँ के हाथों में एक जलती हुई मशाल और एक छुरी होती है, जो ज्ञान और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी तीसरी आँख से दिव्य प्रकाश निकलता है, जो अज्ञानता और नकारात्मकता का नाश करता है।
माँ कालरात्रि का नाम और उसका अर्थ
"कालरात्रि" नाम दो शब्दों से मिलकर बना है - "काल" अर्थात समय और "रात्रि" अर्थात रात। यह दर्शाता है कि माँ कालरात्रि काल का भी नाश करने वाली हैं।
इन्हें "शुभंकारी" भी कहा जाता है, क्योंकि ये अपने भक्तों को हर प्रकार के भय से मुक्त कर शुभ फल प्रदान करती हैं।
माँ कालरात्रि की अलौकिक शक्तियाँ
माँ कालरात्रि की पूजा और साधना से भक्तों को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त होती हैं
- अज्ञानता और अंधकार का नाश: माँ की आराधना करने से जीवन के सभी अंधकार और भ्रम दूर होते हैं।
- भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति: तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जाएँ माँ के स्मरण से समाप्त हो जाती हैं।
- शत्रु बाधा से रक्षा: माँ कालरात्रि की कृपा से शत्रु पराजित होते हैं और षड्यंत्र विफल हो जाते हैं।
- ग्रह बाधाओं का निवारण: माँ की पूजा से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
- साहस और आत्मबल: माँ की कृपा से भय दूर होता है और साहस की प्राप्ति होती है।
माँ कालरात्रि की पूजा विधि
- पूजा तिथि: नवरात्रि के सातवें दिन
- पूजा का समय: ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) या रात के समय
- पूजा सामग्री: लाल और नीले फूल, गुड़, काले तिल, नारियल, दीपक, चंदन, धूप, कर्पूर
"ॐ कालरात्र्यै नमः" (108 बार जाप करें)
"ॐ ऐं ह्रीं क्रीं कालरात्र्यै नमः"
- भोग: माँ को गुड़ और तिल का भोग अर्पित करें।
शनिवार को माँ की पूजा करने से शनि दोष समाप्त होता है।
अपराजिता का फूल अर्पित करने से सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
रात्रि में दीप जलाकर माँ की आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जाएँ समाप्त होती हैं।
निष्कर्ष
माँ कालरात्रि की उपासना करने से व्यक्ति को हर प्रकार के भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। जो भक्त सच्चे मन से माँ की पूजा करते हैं, वे जीवन में सभी समस्याओं से मुक्त होकर ज्ञान, सफलता और समृद्धि प्राप्त करते हैं।
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