माँ कालरात्रि की पूजा से शनि, राहु और केतु के दोष होंगे समाप्त | Maa Kalaratri kee pooja se shani, raahu aur ketu ke dosh honge samaapt

माँ कालरात्रि की पूजा से शनि, राहु और केतु के दोष होंगे समाप्त

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को हर तरह के भय से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से शनि, राहु और केतु ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए माँ कालरात्रि की आराधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में इन ग्रहों से जुड़े दोष हैं, तो माँ कालरात्रि की पूजा करने से उनका प्रभाव कम हो सकता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।


माँ कालरात्रि और शनि ग्रह

ज्योतिष में माँ कालरात्रि को शनि ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने वाली देवी माना जाता है। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए माँ कालरात्रि की पूजा करना अत्यंत लाभकारी होता है।

शनि दोष निवारण के लिए माँ कालरात्रि की पूजा विधि

  1. शनिवार के दिन नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की विशेष पूजा करें।

  2. माँ को काले तिल, गुड़ और सरसों के तेल का दीपक अर्पित करें।

  3. "ॐ कालरात्र्यै नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

  4. जरूरतमंद लोगों को काले वस्त्र, काले तिल या उड़द दान करें।

  5. माँ कालरात्रि के सामने सरसों के तेल का दीप जलाकर शनि मंत्र ("ॐ शं शनैश्चराय नमः") का जप करें।


माँ कालरात्रि और राहु-केतु ग्रह

राहु और केतु ग्रहों का कुंडली में अशुभ प्रभाव कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। राहु ग्रह भ्रम, भय और अस्थिरता देता है, जबकि केतु ग्रह आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ रहस्यमयी घटनाओं को प्रभावित करता है। माँ कालरात्रि की उपासना इन दोनों ग्रहों के दुष्प्रभावों को दूर करने में सहायक होती है।

राहु-केतु दोष निवारण के लिए माँ कालरात्रि की पूजा विधि:

  1. राहु दोष शांति के लिए "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र का जप करें।

  2. केतु दोष से मुक्ति पाने के लिए "ॐ कें केतवे नमः" मंत्र का जप करें।

  3. नवरात्रि में सातवें दिन नीले या काले वस्त्र पहनकर माँ कालरात्रि की पूजा करें।

  4. माँ को नीले फूल, नारियल और काले तिल अर्पित करें।

  5. किसी गरीब या जरूरतमंद को काले तिल, काले चने और जूते दान करें।


अन्य लाभ और विशेष उपाय

  • माँ कालरात्रि को शुभंकरी कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों को हर प्रकार के संकट से मुक्त करती हैं।

  • इस दिन रामायण के उत्तरकांड का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

  • माँ कालरात्रि के पूजन से नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त होती हैं, और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्राप्त होता है।

  • रोग, दुर्घटनाएँ, व्यापार में हानि और मानसिक अशांति को दूर करने के लिए माँ कालरात्रि की दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।


निष्कर्ष

माँ कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को हर प्रकार के भय, रोग, शत्रु और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से शनि, राहु और केतु के कुप्रभावों से बचने के लिए इस नवरात्रि माँ कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करें और उनके दिव्य आशीर्वाद से जीवन को सुख-समृद्धि से भरपूर बनाएं।

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