भय, रोग और शत्रु नाश के लिए माँ कालरात्रि के ये मंत्र हैं अमोघ | bhay, rog aur shatru naash ke lie Maa Kaalratri ke ye mantr hain amogh
भय, रोग और शत्रु नाश के लिए माँ कालरात्रि के ये मंत्र हैं अमोघ
माँ कालरात्रि नवरात्रि के सातवें दिन पूजित होती हैं और वे सभी प्रकार के भय, रोग, शत्रु एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी मानी जाती हैं। उनकी उपासना से व्यक्ति को साहस, शक्ति और आत्मबल प्राप्त होता है। विशेष रूप से, माँ कालरात्रि के मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं, जिनका विधिपूर्वक जाप करने से समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
माँ कालरात्रि के प्रभावशाली मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॐ कालरात्रि दैव्ये नमः
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
ॐ कालरात्र्यै नमः
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे। चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते॥
माँ कालरात्रि की पूजा विधि:
माँ कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन रात्रि के समय विशेष रूप से की जाती है।
माँ को गुड़ या गुड़ से बनी वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए।
नीलकमल और चमेली के फूल माता को अर्पित करें।
माँ कालरात्रि की कृपा प्राप्त करने के लिए नीले रंग के वस्त्र धारण करें।
"एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥"
माँ को अपराजिता का फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
मंत्रों का जाप लाल चंदन की माला से करना चाहिए।
माँ कालरात्रि की कृपा के लाभ:
भय, रोग और शत्रुओं से रक्षा होती है।
नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत बाधाओं का नाश होता है।
आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है।
ग्रह दोष, विशेष रूप से शनि दोष का निवारण होता है।
जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
निष्कर्ष: माँ कालरात्रि की पूजा और उनके मंत्रों का जाप करने से जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं का नाश होता है। जो भी श्रद्धालु विधि-विधान से उनकी उपासना करता है, उसे माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह भयमुक्त जीवन व्यतीत करता है।
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