चैत्र नवरात्रि 2025: माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि, मंत्र और चमत्कारी लाभ | Chaitra Navratri 2025: Maa Siddhidatri kee pooja vidhi, mantr aur chamatkaaree laabh

चैत्र नवरात्रि 2025 माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधिमंत्र और चमत्कारी लाभ

चैत्र नवरात्रि में माँ सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। नवमी तिथि को माँ के इस स्वरूप की पूजा करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और भक्तों को सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों के सभी बिगड़े हुए कार्यों को संवारने वाली देवी हैं। उनका आशीर्वाद असंभव को भी संभव बना देता है।

माँ सिद्धिदात्री का महत्व

नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह देवी सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करने वाली हैं। जो साधक पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से माँ सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं, उन्हें सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। माँ दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने में सहायक होता है।

माँ सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ मुहूर्त (चैत्र नवरात्रि 2025)

तिथि: चैत्र नवरात्रि नवमी

शुभ मुहूर्त:

  • प्रातः 5:55 से 9:08 तक

  • 10:44 से 12:21 तक

मान्यता है कि जो व्यक्ति इस शुभ मुहूर्त में माँ सिद्धिदात्री की पूजा करता है, उसे माँ की कृपा से मोक्ष प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि

  1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. पूजा स्थल की सफाई कर वहाँ माँ सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  3. सबसे पहले भगवान गणपति की पूजा करें, फिर माँ सिद्धिदात्री का आह्वान करें।

  4. माँ सिद्धिदात्री को सफेद पुष्प, सफेद वस्त्र और सफेद मिठाई अर्पित करें।

  5. माँ सिद्धिदात्री की आरती करें और उनके चमत्कारी मंत्रों का जाप करें।

  6. भोग लगाकर भक्तों में प्रसाद वितरण करें।

माँ सिद्धिदात्री के चमत्कारी मंत्र

मुख्य मंत्र:
  • "ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः"
  • "ॐ ह्लीं सिद्धिदात्री महादेवी सर्वसम्पत् सिद्धिं मे कुरु स्वाहा"
  • "ॐ श्रीं ह्लीं क्लीं सिद्धिदात्री नमः"
  • "ॐ सर्वेभ्यो नमः सिद्धिदात्री सर्वदुःख निवारिणी सर्वसिद्धिं प्रदायिनी"
  • "या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।"

अष्ट सिद्धियों के लिए मंत्र:

  • अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व सिद्धियों की प्राप्ति के लिए माँ सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है।

माँ सिद्धिदात्री की पूजा के चमत्कारी लाभ

सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति:

  • अणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूरश्रवण, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना आदि।

शत्रु बाधा से मुक्ति:

  • माँ सिद्धिदात्री की साधना करने से शत्रुओं से छुटकारा मिलता है और जीवन में शांति आती है।

कोर्ट-केस में विजय:

  • यदि किसी कोर्ट-कचहरी के मामले में फंसे हैं, तो माँ सिद्धिदात्री की पूजा से आपको सफलता मिल सकती है।

मनोकामना पूर्ति:

  • माँ सिद्धिदात्री की कृपा से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति:

  • माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष और स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।

भूमि, मकान और धन प्राप्ति:

  • अगर कोई भूमि, मकान, या धन प्राप्त करना चाहता है तो माँ सिद्धिदात्री की पूजा विशेष फलदायी होती है।

संतान प्राप्ति:

  • निःसंतान दंपति यदि माँ सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।

कुंडली के भावों को सशक्त करना:

  • माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से कुंडली के छठे, ग्यारहवें और तृतीय भाव को शक्ति मिलती है, जिससे व्यक्ति को सफलता मिलती है।

निष्कर्ष:

चैत्र नवरात्रि में नवमी तिथि को माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को अपार सुख, शांति और सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। उनके मंत्रों का जाप करने से जीवन की हर कठिनाई दूर होती है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस नवरात्रि, माँ सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा विधि को अपनाएँ और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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