माँ स्कंदमाता के इन मंत्रों के जाप से मिलेगी शक्ति और समृद्धि | Maa Skandamata ke in mantron ke jaap se milegee shakti aur samrddhi
माँ स्कंदमाता के इन मंत्रों के जाप से मिलेगी शक्ति और समृद्धि
चैत्र नवरात्रि की पंचम तिथि को माँ स्कंदमाता की उपासना की जाती है। माँ स्कंदमाता, जो भगवान कार्तिकेय की माता हैं, भक्तों को शक्ति, समृद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं। इनकी पूजा करने से संतान सुख, रोगों से मुक्ति, विवाह में सफलता, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं माँ स्कंदमाता की उपासना विधि, उनके मंत्र, और उनकी कृपा प्राप्त करने के तरीके।
माँ स्कंदमाता की पूजा विधि
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
माँ की प्रतिमा या चित्र को गंगा जल से शुद्ध करें।
उन्हें कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, और मिष्ठान अर्पित करें।
घी का दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा करें।
माँ की आरती उतारें, कथा पढ़ें और अंत में माँ के मंत्रों का जाप करें।
माँ स्कंदमाता के शक्तिशाली मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ इस मंत्र का जाप करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
मंत्र जाप की विधि
माँ स्कंदमाता के किसी भी मंत्र की 108 बार माला का जाप करें।
जाप करने से पहले मन को शांत करें और माँ का ध्यान करें।
सुबह या शाम के समय पूजा करना अधिक लाभकारी होता है।
माँ के बीज मंत्रों का जाप करने से जीवन के समस्त विघ्न दूर होते हैं।
माँ स्कंदमाता की उपासना के लाभ
संतान सुख की प्राप्ति होती है।
ज्ञान, बुद्धि और विवेक का विकास होता है।
रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।
विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
मोक्ष की प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
भक्तों को अलौकिक तेज और कांति प्राप्त होती है।
सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
शक्ति, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
माँ स्कंदमाता का स्वरूप
माँ स्कंदमाता सिंह पर सवार हैं और उनकी चार भुजाएँ हैं। दो हाथों में कमल के पुष्प हैं, एक हाथ से वे भगवान कार्तिकेय को गोद में पकड़े हुए हैं, और एक हाथ से अभय मुद्रा में आशीर्वाद दे रही हैं। उनकी उपासना से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं।
नवरात्रि के पंचम दिन का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:34 से 5:20
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:20
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:29 से 6:53
अमृत काल: सुबह 4:06 से 5:53
सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन
रवि योग: शाम 7:40 से अगले दिन सुबह 6:05 तक
निष्कर्ष
माँ स्कंदमाता की उपासना विशेष रूप से शक्ति, समृद्धि और संतान सुख प्राप्ति के लिए की जाती है। उनके मंत्रों का जाप करने से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति आती है। इस नवरात्रि माँ स्कंदमाता की आराधना करें और उनके दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।
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